मध्य पूर्व की आग ठंडी होने का नाम नहीं ले रही। जब भी ईरान और इजराइल की बात होती है, तो हवा में सिर्फ बारूद की गंध आती है। इजराइल के पास दुनिया का सबसे बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम 'आयरन डोम' है, ये सच है। लेकिन ये भी सच है कि ईरान की कुछ ऐसी मिसाइलें हैं जिन्होंने इजराइल की रातों की नींद उड़ा रखी है। ये सिर्फ बयानबाजी नहीं है। हाल के महीनों में हुए हमलों ने दिखा दिया है कि जब सैकड़ों मिसाइलें एक साथ चलती हैं, तो दुनिया का कोई भी डिफेंस सिस्टम पूरी तरह अभेद्य नहीं रहता।
ईरान ने दशकों तक प्रतिबंधों को झेला है, पर उसने अपना मिसाइल प्रोग्राम नहीं रोका। उसने अपनी ताकत को 'अ对称 युद्ध' (Asymmetric warfare) के लिए तैयार किया है। उसे पता है कि वो सीधे तौर पर अमेरिका या इजराइल की एयरफोर्स का मुकाबला नहीं कर सकता, इसलिए उसने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का जाल बिछा दिया। इजराइल को भारी नुकसान होने के बावजूद ईरानी सेना आज भी इन्हीं ताकतों के दम पर डटी है।
वो 5 मिसाइलें जो इजराइल की सुरक्षा में सेंध लगाती हैं
ईरान का मिसाइल भंडार मिडिल ईस्ट में सबसे बड़ा है। इसमें कुछ ऐसी मिसाइलें हैं जो सीधे तेल अवीव को निशाना बना सकती हैं।
1. खैबर शिकन
ये ईरान की सबसे खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक है। इसकी रेंज लगभग 1,450 किलोमीटर है। इसकी खासियत इसकी रफ्तार और मारक क्षमता है। ये मिसाइल सॉलिड फ्यूल पर चलती है, जिसका मतलब है कि इसे बहुत कम समय में लॉन्च किया जा सकता है। इजराइली रडार को इसे पकड़ने के लिए बहुत कम समय मिलता है। खैबर शिकन का नाम ही बताता है कि इसे इजराइल को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
2. फतह हाइपरसोनिक मिसाइल
ईरान का दावा है कि उसके पास हाइपरसोनिक तकनीक है। फतह मिसाइल की रफ्तार ध्वनि की गति से 13 से 15 गुना ज्यादा बताई जाती है। हाइपरसोनिक मिसाइलें सिर्फ तेज नहीं होतीं, वो हवा में अपना रास्ता बदल सकती हैं। जब कोई मिसाइल जिग-जैग तरीके से चलती है, तो आयरन डोम या एरो-3 जैसे सिस्टम का कंप्यूटर ये कैलकुलेट नहीं कर पाता कि उसे इंटरसेप्ट कहाँ करना है। अगर ये दावा पूरी तरह सही है, तो ये इजराइल के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
3. शहाब 3 मिसाइल
ये ईरान की मिसाइल ताकत की नींव है। इसे पुराने उत्तर कोरियाई डिजाइन पर बनाया गया था, लेकिन अब ये पूरी तरह ईरानी है। इसकी रेंज 2,000 किलोमीटर तक जाती है। मतलब ये ईरान की गहराई से लॉन्च होकर इजराइल के किसी भी कोने को छू सकती है। ये मिसाइल बड़ी मात्रा में पेलोड ले जाने में सक्षम है, जो बड़े धमाकों के लिए जानी जाती है।
4. इमाद मिसाइल
ये शहाब-3 का ही एक आधुनिक रूप है। इमाद की खासियत इसका 'मैन्यूवरेबल री-एंट्री व्हीकल' (MaRV) है। जब ये मिसाइल अंतरिक्ष से वापस वायुमंडल में आती है, तो इसे गाइड किया जा सकता है। इससे इसकी सटीकता बहुत बढ़ जाती है। इजराइल के सैन्य ठिकानों को पिनपॉइंट निशाना बनाने के लिए ईरान इसी का इस्तेमाल करता है।
5. सेज्जिल मिसाइल
सेज्जिल एक टू-स्टेज मिसाइल है जो सॉलिड फ्यूल का इस्तेमाल करती है। लिक्विड फ्यूल वाली मिसाइलों को भरने में घंटों लगते हैं, जिससे वो सैटेलाइट की नजर में आ जाती हैं। लेकिन सेज्जिल को ट्रक पर लादकर कहीं भी ले जाया जा सकता है और चंद मिनटों में फायर किया जा सकता है। इसकी रफ्तार और रेंज इसे एक घातक हथियार बनाती है।
क्या वाकई आयरन डोम फेल हो रहा है
हमें ये समझना होगा कि कोई भी तकनीक 100% फुलप्रूफ नहीं होती। इजराइल का डिफेंस सिस्टम 'लेयर्ड' है। सबसे नीचे आयरन डोम, उसके ऊपर डेविड स्लिंग और सबसे ऊपर एरो-2 और एरो-3। जब ईरान एक साथ 200-300 मिसाइलें दागता है, तो वो इजराइल की 'इंटरसेप्शन क्षमता' को संतृप्त (saturate) करने की कोशिश करता है।
अगर इजराइल के पास 100 इंटरसेप्टर मिसाइलें तैनात हैं और ईरान 150 मिसाइलें भेज दे, तो गणित सीधा है—50 मिसाइलें नीचे गिरेंगी। हालिया हमलों में हमने देखा कि कुछ ईरानी मिसाइलें इजराइली एयरबेस के करीब गिरीं। भारी नुकसान के बावजूद ईरान का अड़े रहना इसी बात का सबूत है कि वो अपनी मिसाइल तकनीक की पहुंच को लेकर आश्वस्त है। इजराइल को नुकसान पहुँचता है, पर वो उसे छिपाने की कोशिश करता है ताकि जनता में पैनिक न फैले।
ईरानी सेना की असल ताकत उसकी जिद है
ईरान के पास सिर्फ मिसाइलें नहीं हैं, उसके पास 'प्रॉक्सिस' का एक पूरा नेटवर्क है। हिजबुल्ला, हमास और हूतियों के पास ईरान की ही तकनीक वाली हजारों कम दूरी की मिसाइलें और ड्रोन हैं। जब ईरान अपनी लंबी दूरी की मिसाइलें चलाता है, तो साथ ही ये गुट भी हमला करते हैं। ये 'मल्टी-फ्रंट वॉर' इजराइल के लिए असली चुनौती है। ईरान को पता है कि वो हथियारों की क्वालिटी में शायद पीछे रह जाए, पर क्वांटिटी में वो इजराइल को थका सकता है।
ईरानी सेना का ढांचा ऐसा है कि उनके पास खोने के लिए बहुत कुछ नहीं है। दशकों के प्रतिबंधों ने उन्हें आत्मनिर्भर बना दिया है। वो अपनी मिसाइलों के इंजन से लेकर गाइडेंस सिस्टम तक खुद बना रहे हैं। ये बात इजराइल और अमेरिका दोनों को खटकती है।
आगे क्या होने वाला है
ईरान अपनी मिसाइल क्षमता को लगातार अपग्रेड कर रहा है। अब वो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सटीक नेविगेशन पर काम कर रहा है। इजराइल भी चुप नहीं बैठा है। वो अपने 'लेजर डिफेंस सिस्टम' (आयरन बीम) को जल्द से जल्द तैनात करना चाहता है क्योंकि ये सस्ता है और इसकी कोई लिमिट नहीं है।
अगर आप इस स्थिति को करीब से देख रहे हैं, तो कुछ चीजें स्पष्ट हैं। पहला, ईरान अपनी मिसाइल ताकत के दम पर इस क्षेत्र में अपनी धक जमाए रखेगा। दूसरा, इजराइल का सुरक्षा कवच कितना भी मजबूत हो, उसे हर बार कुछ न कुछ नुकसान झेलना ही पड़ेगा। ये एक अंतहीन दौड़ है जहाँ एक तरफ हमला करने की नई तकनीक है और दूसरी तरफ उसे रोकने की जद्दोजहद।
ईरान और इजराइल के इस संघर्ष में अगली बार जब आसमान में रोशनी दिखे, तो समझ लीजिए कि वो सिर्फ पटाखे नहीं हैं। वो अरबों डॉलर की तकनीक और दशकों पुरानी नफरत का टकराव है।
दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ये जंग और भी ज्यादा तकनीकी होगी। ईरान अब ड्रोन और मिसाइलों को मिलाकर 'स्वार्म अटैक' (झुंड में हमला) करने की तैयारी में है। इससे इजराइल के लिए खतरा और भी जटिल हो जाएगा। आपको बस इतना करना है कि खबरों को केवल हेडलाइंस से न देखें। इन मिसाइलों के पीछे की साइंस और स्ट्रेटजी को समझना जरूरी है क्योंकि यही इस पूरे खेल का असली सच है।
अपनी सुरक्षा रणनीतियों को लेकर इजराइल अब और भी ज्यादा आक्रामक हो सकता है। वो शायद ईरान के लॉन्च पैड्स पर प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक करने की कोशिश करे। लेकिन ईरान ने अपनी मिसाइलें जमीन के नीचे 'मिसाइल सिटीज' में छिपाई हुई हैं। ये सुरंगें इतनी गहरी हैं कि इन पर साधारण बमों का असर नहीं होता। कुल मिलाकर, ये शह और मात का खेल फिलहाल खत्म होता नहीं दिख रहा।
ईरान की इन ताकतों ने ये साबित कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ एयरफोर्स का होना काफी नहीं है। अगर आपके पास सटीक और मारक मिसाइलें हैं, तो आप दुनिया के सबसे ताकतवर सुरक्षा घेरे को भी चुनौती दे सकते हैं। ईरान आज इसी जिद के साथ खड़ा है।